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समुदाय के नाम एक संदेश

अध्यक्षीय संदेश

प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड · 2026

प्रिय युवा शिक्षार्थियों, विचारकों और आने वाले कल के कर्णधारों,

जोहार!

हमारे युवा शिक्षार्थियों, विचारकों और आने वाले कल के कर्णधारों को प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड में आमंत्रित करते हुए मुझे अत्यंत गर्व और अपार हर्ष की अनुभूति हो रही है।

एक अलग तरह का ओलंपियाड

पारंपरिक रूप से, शैक्षणिक ओलंपियाड गणित, विज्ञान और भाषा जैसे औपचारिक विषयों में व्यक्तिगत दक्षता का परीक्षण करने के मंच रहे हैं। यद्यपि ये प्रतिस्पर्धात्मक मंच विश्लेषणात्मक बौद्धिकता को निखारते हैं, परंतु वे सफलता को एक मानकीकृत और कक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण से ही मापते हैं।

प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड की परिकल्पना एक सर्वथा भिन्न प्रतिमान पर आधारित है। यह केवल किताबी ज्ञान का परीक्षण नहीं है, बल्कि आदिवासी पहचान की जीवंत धरोहर को पुनः प्रतिष्ठित करने और उसे गौरवान्वित करने का एक बौद्धिक व सांस्कृतिक आंदोलन है।

एक महत्त्वपूर्ण खाई को पाटना

दशकों से औपचारिक स्कूली पाठ्यक्रमों ने बड़े पैमाने पर आदिवासी समुदायों के समृद्ध ज्ञान-तंत्र (ज्ञानमीमांसा) की उपेक्षा की है। वह मौलिक ज्ञान, जिसने पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखा, जुझारू समाजों का निर्माण किया और सामुदायिक एकजुटता की रक्षा की, आज भी पाठ्यपुस्तकों के पन्नों से पूरी तरह गायब है।

यह ओलंपियाड उसी खाई को पाटने का प्रयास करता है। यह कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को पारंपरिक पाठ्यक्रमों से परे जाकर अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने और मूल आदिवासियत की भावना को पुनर्भाषित करने का एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

जीवंत वास्तविकता में रचा-बसा पाठ्यक्रम

इस ओलंपियाड का पाठ्यक्रम हमारे जनमानस की वास्तविक जीवन-शैली में रचा-बसा है। इसमें आदिवासी प्रज्ञा और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली शामिल है, जिसके अंतर्गत हम पारिस्थितिक संतुलन, नृजाति-वनस्पति विज्ञान (एथ्नोबॉटनी), वाचिक परंपराओं और सतत सह-अस्तित्व को समझेंगे। हम आदिवासी प्रतिरोध, पराक्रम और संप्रभुता व स्वायत्तता के लिए लड़ने वाले अमर पुरोधाओं के अलिखित इतिहास को सामने लाने से जुड़े प्रश्न प्रस्तुत कर रहे हैं।

आदिवासी ओलंपियाड उन पारंपरिक खेलों और पारंपरिक कृषि तकनीकों को भी रेखांकित करेगा, जो सामूहिक श्रम और मिट्टी के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाते हैं। इसके साथ ही, हम अपनी कला, संगीत और भाषाई संपदा की समृद्धि को जानेंगे और वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाने वाले आधुनिक आदिवासी नेतृत्वकर्ताओं, विद्वानों और समाज-सुधारकों के योगदान को रेखांकित करेंगे।

हमारे युवा प्रतिभागियों के नाम

यह मंच आपका है। इसमें जिज्ञासा, गर्व और खुले मन के साथ भाग लें। आप कहाँ से आते हैं, यह जानना ही आपके भविष्य की दिशा तय करने की सबसे बड़ी ताकत है।

यह ओलंपियाड आपको अपनी पहचान को गर्व के साथ अपनाने और हमारी साझी विरासत को भविष्य की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करे।

अभी पंजीकरण करें — ₹300

जोहार,

श्री महादेव टोप्पो

अध्यक्ष, प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलंपियाड